फ़ेलोशिप में रुचि लेने के लिए धन्यवाद। आवेदन की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है।
पीजी डॉक्टरों के लिए एक अस्पताल-आधारित फेलोशिप जो भारत में वंचित समुदायों में काम करना चुनते हैं। ये उन अनुभवी मेंटर्स से सीखने का अनूठा अवसर है जिन्होंने अपना जीवन इस काम में लगा दिया और वास्तविक, व्यावहारिक अनुभव के माध्यम से आगे बढ़े हैं।
एम बी बी एस के साथ एम डी/एम एस/डी एन बी की
योग्यता
जनवरी- दिसंबर 2027
कार्यक्रम की अवधि
7 क्लिनिकल और सर्जिकल
विशेषज्ञताएँ
सी एम सी वेल्लोर
4 हफ्ते की ऑब्सर्वरशिप के साथ प्रमाणपत्र
15- भारत भर में सुस्थापित जनहितकारी अस्पताल
लोकेशन
आकर्षक मानदेय और अन्य लाभ
दीर्घकालीन रोजगार के संभावित अवसर
आवेदन की अंतिम तिथि : 30 सितंबर 2026
हमारा विश्वास है कि अच्छा स्वास्थ्य हर व्यक्ति और हर परिवार का अधिकार है।
हम स्वास्थ्य को लोकहित की भांति देखते हैं। इसीलिए हम सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में सामुदायिक स्तर के संपर्क व्यक्ति से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और द्वितीयक अस्पतालों तक मदद कर रहे हैं। जब व्यवस्था का हर पुर्जा ठीक से काम करेगा तो स्वास्थ्य सेवाएँ, सुलभ, विश्वसनीय और मानवीय हो जाएंगी।
स्वास्थ्य में हमारा काम 2022 में आरंभ हुआ था और लगातार बढ़ रहा है। और जानें
एक उद्देश्यपरक विकल्प!
एक पीजी डॉक्टर के रूप में आपके सामने दो विकल्प हैं। घिसा-पिटा रास्ता चुनना, या एक नया रास्ता बनाना।
यह निमंत्रण है आपको, उस रास्ते पर चलने के लिए, जिस पर कम लोग ही चले हैं, ये निमंत्रण है, ग्रामीण भारत के कुछ सबसे वंचित क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की सेवा करने का, जहाँ अच्छी स्वास्थ्य सेवा तक पहुँचना सबसे कठिन हो सकता है,
निमंत्रण है यह जानने का कि उद्देश्यपरक चिकित्सा प्रैक्टिस करने का मतलब क्या है।
आइये, खुद को आज़ाद कीजिये और भारत में स्वास्थ्य समता के लक्ष्य को पाने में अपना सहयोग दें
आप क्या-क्या अनुभव पाएँगे?
- लोकहितकारी अस्पतालों में काम करने का एक खास अनुभव
- अनेक प्रकार के मेडिकल केस
- विशेषज्ञों द्वारा मेंटरशिप
- सी एम सी वेल्लोर द्वारा ऑब्सर्वरशिप और प्रमाणपत्र
फ़ेलोशिप की लोकेशन
ये फ़ेलोशिप अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन और भारत के 15 अन्य गैर-लाभकारी संस्थानों का साझा प्रयास है।
अश्विनी (एसोसिएशन फॉर हेल्थ वेलफ़ेयर इन नीलगिरि)
अश्विनी का गुडालूर आदिवासी अस्पताल (GAH) वर्ष 1990 में स्थापित किया गया था। आज यह 50 बिस्तरों वाला, गैर-लाभकारी और समुदायिक स्वामित्व वाला अस्पताल है, जो तमिलनाडु के सबसे वंचित क्षेत्रों में से एक में सेवा प्रदान करता है। इसकी सेवाओं में सामान्य सर्जरी, प्रसूति एवं स्त्रीरोग, पारिवारिक चिकित्सा, आपातकालीन एवं नैदानिक सेवाएँ तथा विजिटिंग विशेषज्ञों के क्लिनिक शामिल हैं। 12 बिस्तरों वाली प्रसूति इकाई के माध्यम से अस्पताल क्षेत्र की 94 प्रतिशत आदिवासी महिलाएँ अस्पताल में प्रसव सुनिश्चित करता है। इसका सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रम अपने स्वास्थ्य केन्द्रों, स्वास्थ्य एनिमेटरों और ग्रामीण स्वयंसेवी के माध्यम से 320 बस्तियों के 20 हज़ार आदिवासियों तक पहुँच चुका है।
क्रिश्चियन अस्पताल छतरपुर
वर्ष 1930 में स्थापित 100 बिस्तरों वाला क्रिश्चियन अस्पताल छतरपुर (CHC), मध्य प्रदेश के छतरपुर ज़िले में गरीब और वंचित समुदायों को किफायती स्वास्थ्य सेवाएँ और शिक्षा प्रदान करता है। इसकी सेवाओं में प्रसूति एवं स्त्रीरोग, बाल चिकित्सा, सामान्य चिकित्सा, हड्डी रोग, नेत्र चिकित्सा, दंत चिकित्सा, मनोचिकित्सा और गंभीर रोग चिकत्सा शामिल हैं। अस्पताल में लेवल 3 की एनआईसीयू भी है। इसका सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रम 124 ग्रामीण गांवों और 10 शहरी वार्डों के लोगों तक पहुँचता है। इनमें प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा, स्कूल स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम, ग्रामीण नेत्र-जांच शिविर, दिव्यांगजनों के समावेशन की पहल तथा कमजोर परिस्थितियों में रहने वाली लड़कियों के लिए सहायता शामिल है।
क्रिश्चियन अस्पताल बिसमकुट्टक
क्रिश्चियन अस्पताल बिसमकुट्टक (CHB), उड़ीसा के रायगड़ा ज़िले में स्थित 200 बिस्तरों वाला बहु-विषयक गैर-लाभकारी अस्पताल है। यहाँ सामान्य चिकित्सा, सामान्य सर्जरी, बाल चिकित्सा, प्रसूति एवं स्त्रीरोग, एनेस्थीसिया, नेत्र चिकित्सा, दंत चिकित्सा तथा आपातकालीन एवं गंभीर रोगी देखभाल की सेवाएँ उपलब्ध हैं। अस्पताल में ब्लड बैंक, प्रयोगशाला और रेडियोलॉजी की सुविधाएँ भी हैं। इसका ‘मित्र’ सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रम 54 दूरदराज़ गांवों में निवारक, प्राथमिक तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करता है और रायगड़ा, कालाहांडी, कंधमाल तथा दक्षिणी और पश्चिमी उड़ीसा के आसपास के ज़िलों में 13,500 से अधिक लोगों तक सेवाएँ पहुँचाता है।
ग्राम सेवा ट्रस्ट
ग्राम सेवा ट्रस्ट की स्थापना 1994 में गुजरात के नवसारी, सूरत और डांग ज़िलों तथा महाराष्ट्र के नासिक ज़िले के सुरगाणा ब्लॉक में ग्रामीण और आदिवासी समुदायों की सेवा के लिए की गई थी। इसका 100 बिस्तरों वाला अस्पताल सामान्य चिकित्सा, सर्जरी, प्रसूति एवं स्त्रीरोग, बाल चिकित्सा, हड्डी, दंत, नाक कान व गला, त्वचा रोग और मनोचिकित्सा में द्वितीयक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करता है। अस्पताल में आईसीयू, एनआईसीयू, डायलिसिस यूनिट, ऑपरेशन थिएटर, प्रयोगशाला, फिजियोथेरेपी विभाग और जिला अर्ली इंटेर्वेंशन केंद्र भी हैं। इसके सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रम नवसारी और डांग ज़िलों के 109 गांवों तक पहुँच बनाए हुए हैं तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, किशोर स्वास्थ्य, गैर-संक्रामक रोगों और मानसिक स्वास्थ्य पर काम करते हैं।
चिंचपाड़ा क्रिश्चियन अस्पताल
महाराष्ट्र के नंदुरबार ज़िले में स्थित 50 बिस्तरों वाला गैर-लाभकारी चिंचपाड़ा क्रिश्चियन अस्पताल (CCH) वर्ष 1942 में स्थापित किया गया था। यह मुख्य रूप से नंदुरबार और नवापुर तालुकों, धुले ज़िले के सकरी क्षेत्र, नासिक ज़िले के कुछ हिस्सों तथा गुजरात के आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले गरीब और दूरदराज़ के आदिवासी समुदायों, खासतौर पर भील जनजाति को सेवाएँ प्रदान करता है। अस्पताल में सामान्य चिकित्सा, सामान्य सर्जेरी, प्रसूति एवं स्त्रीरोग, दंत चिकित्सा, आपातकालीन एवं गंभीर रोगी देखभाल की सुविधाएँ उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त, यहाँ रेडियोलॉजी, प्रयोगशाला, फिजियोथेरेपी और व्यावसायिक चिकित्सा सेवाएँ भी प्रदान की जाती हैं। इसका सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रम लगभग 16,000 लोगों तक पहुँचता है। इसके अंतर्गत सिकल सेल रोग की जांच और देखभाल, टीबी एवं कुष्ठ नियंत्रण, गैर-संक्रामक रोगों की जांच, घर-आधारित उपशामक देखभाल तथा दिव्यांगता पुनर्वास कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं।
जन स्वास्थ्य सहयोग
जन स्वास्थ्य सहयोग (JSS) की स्थापना 2000 में उन स्वास्थ्य पेशेवरों द्वारा की गई थी, जिन्होंने छत्तीसगढ़ के बिलासपुर ज़िले में अचानकमार टाइगर रिज़र्व के वन क्षेत्र में काम करने का निर्णय लिया था। इसका सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रम रिज़र्व के 72 गांवों की सेवा करता है, जबकि इसका 150 बिस्तरों वाला अस्पताल छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के आसपास के नौ ज़िलों के लोगों को स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करता है। JSS पारिवारिक चिकित्सा और सामान्य शल्यचिकित्सा में स्नातकोत्तर डॉक्टरों के साथ-साथ ऑपरेशन थिएटर और प्रयोगशालाओं के लिए बीएससी, नर्सों तथा पैरामेडिकल कर्मचारियों को प्रशिक्षण देता है। यह छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश सरकारों के साथ मिलकर सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने का कार्य भी करता है।
ट्राइबल हेल्थ इनिशिएटिव (THI)
ट्राइबल हेल्थ इनिशिएटिव (THI) की स्थापना 1993 में तमिलनाडु के धर्मपुरी ज़िले की सिट्टिलिंगी घाटी में हुई थी। इसके 35 बिस्तरों वाले अस्पताल में प्राथमिक और द्वितीयक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हैं, जिनमें सर्जरी और प्रसूति देखभाल, अल्ट्रासाउंड, एंडोस्कोपी तथा लैप्रोस्कोपिक सर्जरी शामिल हैं। THI का सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रम लगभग 10,000 लोगों की आबादी वाले 25 गांवों तक शिक्षा और स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़ी गतिविधियाँ करता है।
मकुंदा क्रिश्चियन कुष्ठ एवं सामान्य अस्पताल
मकुंदा क्रिश्चियन कुष्ठ एवं सामान्य अस्पताल असम, त्रिपुरा और मिज़ोरम के त्रि-जंक्शन पर स्थित है। वर्ष 1950 में कुष्ठ रोगियों की बस्ती के रूप में स्थापित यह केंद्र अब पूर्वोत्तर भारत के ग्रामीण समुदायों की सेवा करने वाला स्वास्थ्य केंद्र बन चुका है। इसकी सेवाओं में सामान्य चिकित्सा, सामान्य सर्जरी, प्रसूति एवं स्त्रीरोग, हड्डी रोग, मनोचिकित्सा, दंत चिकित्सा, आईसीयू और एनआईसीयू सेवाएँ, प्रयोगशाला एवं रेडियोलॉजी जांच, ब्लड बैंक तथा शारीरिक पुनर्वास शामिल हैं। इसके सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रम 148 गांवों तक पहुँचते हैं और इनमें प्रसव-पूर्व क्लिनिक तथा रोगों की शीघ्र पहचान एवं पुनर्वास क्लिनिक शामिल हैं। अस्पताल शैक्षणिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों के साथ अनुसंधान तथा स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर भी काम करता है।
मधेपुरा, क्रिश्चियन अस्पताल
1953 में स्थापित मधेपुरा क्रिश्चियन अस्पताल (MCH), बिहार के उत्तर-पूर्वी मधेपुरा ज़िले में स्थित 100 बिस्तरों वाला अस्पताल है। यह क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण रेफरल केंद्र के रूप में कार्य करता है और मरीजों को अपने घर के नज़दीक उपचार उपलब्ध कराने में सहायता करता है। इसकी नैदानिक सेवाओं में सामान्य चिकित्सा, लैप्रोस्कोपिक सर्जरी, प्रसूति एवं स्त्रीरोग, बाल चिकित्सा, नवजात आईसीयू और आईसीयू देखभाल, एनेस्थीसियोलॉजी, मनोचिकित्सा, आपातकालीन देखभाल, दंत सेवाएँ, शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास तथा उपशामक देखभाल शामिल हैं। इसका सामुदायिक स्वास्थ्य एवं विकास कार्यक्रम 50 गांवों में 91,895 लोगों तक पहुँच रखता है। इन कार्यक्रमों में चिकित्सा शिविर, कुपोषण और गैर-संचारी रोगों की जांच, घर-आधारित उपशामक देखभाल, गैर-औपचारिक विद्यालय तथा युवा महिलाओं के लिए होम हेल्थ ऐड पाठ्यक्रम संचालित करने वाला सामुदायिक कॉलेज शामिल हैं।
माँ दंतेश्वरी अस्पताल (सर्च)
हर्बर्टपुर क्रिश्चियन अस्पताल (HCH) की स्थापना 1936 में उत्तराखंड की पश्चिमी दून घाटी में हुई थी। यह 150 बिस्तरों वाला अस्पताल सामान्य सर्जरी, अस्थि रोग, बाल चिकित्सा, नाक कान व गला, त्वचा रोग, दंत चिकित्सा तथा प्रसूति एवं स्त्रीरोग में द्वितीयक और विशेषज्ञ द्वारा स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करता है। अस्पताल में चार ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, नवजात आईसीयू, आपातकालीन सेवाएँ, डायलिसिस, रेडियोलॉजी, प्रयोगशाला और ब्लड-बैंक की सुविधाएँ हैं। टीबी देखभाल के लिए यहाँ DOTS केंद्र भी है। इसके सामुदायिक कार्यक्रम उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में दिव्यांगता देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ, उपशामक देखभाल तथा बेसहारा महिलाओं को सहायता प्रदान करते हैं।
विवेकानंद मेमोरियल अस्पताल
1998 में स्थापित विवेकानंद मेमोरियल अस्पताल (VMH), कर्नाटक के मैसूरु ज़िले के सरगुर में स्थित 100 बिस्तरों वाला गैर-लाभकारी अस्पताल है। यह सामान्य चिकित्सा, सामान्य सर्जरी, प्रसूति एवं स्त्रीरोग, बाल चिकित्सा एवं नवजात चिकित्सा, अस्थि रोग, नेत्र और दंत चिकित्सा, मनोचिकित्सा और आयुर्वेद के साथ-साथ आपातकालीन एवं गंभीर रोगी देखभाल, नैदानिक सेवाएँ और विशेषज्ञ परामर्श प्रदान करता है। VMH स्वास्थ्य सेवा प्रशिक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य इंटर्नशिप में भी सहयोग करता है। इसका सामुदायिक स्वास्थ्य नेटवर्क मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयों और स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से 95 केंद्रों पर लगभग 4,00,000 लोगों और 74 आदिवासी गांव तक सेवाएँ पहुंचाता है।
शहीद अस्पताल
शहीद अस्पताल छत्तीसगढ़ के बालोद ज़िले के दल्लीराजहरा में स्थित 150 बिस्तरों वाला अस्पताल है। इसकी स्थापना 1983 में श्रमिकों द्वारा निर्मित और श्रमिकों द्वारा संचालित संस्था के रूप में की गई थी। अस्पताल की स्थापना के लिए श्रमिकों ने अपने वेतन का एक हिस्सा और स्वैच्छिक श्रम का योगदान दिया था। यह बालोद, कांकेर, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और राजनांदगांव ज़िलों के ग्रामीण खनन क्षेत्र के समुदायों को स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करता है। इसकी सुविधाओं में ऑपरेशन थिएटर, पैथोलॉजी प्रयोगशाला, ब्लड बैंक, हाई डिपेंडेंसी यूनिट, नवजात शिशु कक्ष, फिजियोथेरेपी, दंत सेवाएँ, सोनोग्राफी, एक्स-रे और सीटी स्कैन जांच शामिल हैं। इसके सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यों में गांव-स्तरीय स्वास्थ्य जागरूकता अभियान, श्रमिकों तक पहुँच, सिकल सेल एनीमिया के प्रति जागरूकता और साँप के काटने से होने वाली चोटों पर कार्यशालाएँ शामिल हैं।
सेवा रूरल (सोसाइटी फॉर एजुकेशन, वेलफेयर एंड एक्शन)
सेवा रूरल वर्ष 1980 से दक्षिण गुजरात के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य तथा विकास के क्षेत्र में कार्य करने वाला एक स्वैच्छिक विकास संगठन है। इसका 275 बिस्तरों वाला कस्तूरबा अस्पताल प्रसूति एवं स्त्रीरोग, बाल चिकित्सा, नेत्र चिकित्सा, सामान्य चिकित्सा और पूर्व-नियोजित सर्जरी, और आपातकालीन सेवाएँ प्रदान करता है। अस्पताल में आसपास के ज़िलों और राज्यों के 3,000 से अधिक गांवों से मरीज आते हैं। समुदाय में नेत्र तथा प्रसूति एवं स्त्रीरोग शिविरों के अलावा, सेवा ग्रामीण किशोर स्वास्थ्य, सिकल सेल अनुसंधान, बाल स्वास्थ्य, एनीमिया जांच तथा प्रसव उपरांत महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए टेली-काउंसलिंग जैसे व्यापक कार्यक्रम भी चलाता है।
स्वामी विवेकानंद मेडिकल मिशन
स्वामी विवेकानंद मेडिकल मिशन (SVMM) की स्थापना 2002 में केरल के पालक्काड ज़िले के अगली में हुई थी। यह अट्टाप्पाडी आदिवासी ब्लॉक के वंचित आदिवासी समुदायों को निःशुल्क और रियायती स्वास्थ्य सेवाएँ तथा सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रदान करता है। इसके 50 बिस्तरों वाले अस्पताल में बाह्य रोगी, भर्ती रोगी और आपातकालीन सेवाओं के साथ-साथ एमआईसीयू, एनआईसीयू, प्रसव कक्ष, ऑपरेशन थिएटर, प्रयोगशाला, रेडियोलॉजी और एम्बुलेंस सेवाएँ उपलब्ध हैं। इसका सामुदायिक स्वास्थ्य कार्य गांव के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से 192 बस्तियों तक सिकल सेल एनीमिया, मानसिक स्वास्थ्य एवं नशामुक्ति, मातृ एवं शिशु पोषण, किशोर स्वास्थ्य तथा स्कूल स्वास्थ्य पर केंद्रित कार्य करता है।
हरबर्टपुर क्रिश्चियन अस्पताल
हर्बर्टपुर क्रिश्चियन अस्पताल (HCH) की स्थापना 1936 में उत्तराखंड की पश्चिमी दून घाटी में हुई थी। यह 150 बिस्तरों वाला अस्पताल सामान्य सर्जरी, अस्थि रोग, बाल चिकित्सा, नाक कान व गला, त्वचा रोग, दंत चिकित्सा तथा प्रसूति एवं स्त्रीरोग में द्वितीयक और विशेषज्ञ द्वारा स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करता है। अस्पताल में चार ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, नवजात आईसीयू, आपातकालीन सेवाएँ, डायलिसिस, रेडियोलॉजी, प्रयोगशाला और ब्लड-बैंक की सुविधाएँ हैं। टीबी देखभाल के लिए यहाँ DOTS केंद्र भी है। इसके सामुदायिक कार्यक्रम उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में दिव्यांगता देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ, उपशामक देखभाल तथा बेसहारा महिलाओं को सहायता प्रदान करते हैं।
आवेदन और नामांकन
आपकी फेलोशिप यात्रा यहीं से शुरू होती है
ग्रामीण और दूर-दराज़ भारत के समुदायों की देखभाल की ज़िम्मेदारी लेने के लिए तत्पर डॉक्टरों के लिए एक सरल चयन प्रक्रिया।
पात्रता
अपनी पात्रता जाँचें-
- वंचितों की सेवा करने की प्रतिबद्धता और सीमित संसाधनों वाले संस्थानों में काम करने का लचीलापन।
- एमबीबीएस + एमडी/एमएस/डीएनबी- एनेस्थीसिया, सामुदायिक चिकित्सा, पारिवारिक चिकित्सा, सामान्य चिकित्सा, सामान्य सर्जरी, ओबी-गाइनी या बाल चिकित्सा में।
- पंजीकरण राज्य चिकित्सा परिषद के साथ ।
- स्थानांतरण की सम्मति सहभागी अस्पताल स्थानों पर
चयन प्रक्रिया
चयन प्रक्रिया के पाँच सरल चरण
- ऑनलाइन आवेदन करें
अपना आवेदन पूरा करें और अपना रिज़्यूमे अपलोड करें। - आवेदन समीक्षा
आपके आवेदन की समीक्षा की जाती है।
- साक्षात्कार
चयनित उम्मीदवार दो बार ऑनलाइन चर्चा से गुज़रेंगे। - अंतिम प्रस्ताव
चयनित उम्मीदवारों को ऑफर भेजा जाता है।
- फेलोशिप में शामिल हों
शामिल होने की औपचारिकताएँ पूरी करें और अपनी फेलोशिप शुरू करें।
प्रमुख तिथियाँ
30 सितंबर 2026
आवेदन समाप्त
31 अक्टूबर 2026 तक
चयनित उम्मीदवारों को ऑफर भेजे जाते हैं
अक्तूबर 26- जनवरी 2027
फेलोशिप आरंभ
Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या फेलो को मानदेय मिलेगा?
हाँ, अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन फेलो को एक मानदेय प्रदान करेगा, और यह वेतन नहीं है। यह दो भागों में होगा — 60,000 रुपये का मासिक भुगतान, और कार्यक्रम के सफल समापन पर 2.4 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान। इसके अलावा, आप चिकित्सा, दुर्घटना और जीवन बीमा कवरेज, ग्रेच्युटी और प्रोविडेंट फंड जैसे सभी फाउंडेशन लाभों के पात्र होंगे। इसके अतिरिक्त, फाउंडेशन भाग लेने वाले संस्थानों के स्थानों पर स्थानांतरण और यात्रा लागत वहन करेगा। फेलो को किए गए सभी भुगतान वैधानिक कटौतियों और लागू करों के अधीन होंगे, यदि कोई हों तो।
फेलोशिप के लिए कौन सी विशेषज्ञताएँ पात्र हैं?
फेलोशिप एनेस्थीसिया, सामुदायिक चिकित्सा, पारिवारिक चिकित्सा, सामान्य चिकित्सा, सामान्य शल्यचिकित्सा, ओबी गाइनी, पीडियाट्रिक में स्नातकोत्तर डॉक्टरों के लिए उपलब्ध है।
फेलो के लिए क्या रहने की व्यवस्था प्रदान की जाएगी?
जिन संस्थानों में फेलो तैनात हैं, वे व्यक्तियों या परिवारों के लिए उपयुक्त रहने की व्यवस्था प्रदान करेंगे, या उसी की सुविधा देंगे।
क्या फेलो को फेलोशिप के अंत में प्रमाण पत्र मिलेगा?
हाँ। कार्यक्रम के अंत में, अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन से पूर्णता का प्रमाण पत्र मिलेगा और साथ ही सी एम सी वेल्लोर से ऑब्सर्वरशिप का प्रमाणपत्र भी मिलेगा।
कार्यक्रम से फेलो को कैसे लाभ होगा?
विविध रोगी भार के साथ, अस्पताल फेलो को नैदानिक कौशल का पहले से अभ्यास करने और सीखने का अवसर प्रदान करेंगे। फेलो सीएमसी वेल्लोर में चार सप्ताह के ऑब्ज़र्वरशिप कार्यक्रम का भी हिस्सा होंगे। फेलो भारत के विभिन्न हिस्सों में स्थापित चिकित्सा केंद्रों के अत्यधिक अनुभवी मेंटर्स से भी सीखेंगे, जिससे उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य की समझ विकसित करने और अपनी विशेषज्ञता का कार्य अनुभव प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
फेलोशिप का बेस कहाँ होगा?
फेलोशिप का स्थान भारत भर में स्थित 15 सहयोगी संस्थानों के कार्यक्षेत्र होंगे।
फेलोशिप के बाद कौन से प्लेसमेंट अवसर उपलब्ध हैं?
फेलोशिप साझेदार अस्पतालों और अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के साथ काम करने के अवसर खोलेगी, जो स्वास्थ्य में इसके ज़मीनी कार्य में और अज़ीम प्रेमजी अस्पतालों के हिस्से के रूप में योगदान देगी।
यह फेलोशिप एक विशेषज्ञ फेलोशिप या रेजीडेंसी से कैसे अलग है?
यह कार्यक्रम एक विशेषज्ञ फेलोशिप या रेजीडेंसी से अलग है। हम 15 भाग लेने वाले संस्थानों में क्लिनिकल और सामुदायिक कार्य में समृद्ध अनुभव प्रदान करना चाहते हैं। इससे आपको बीमारी के कारणों और उसकी प्रस्तुति को समझने में मदद मिलेगी, और यह कि चिकित्सा ज्ञान को किस प्रकार संदर्भ के अनुसार ढाला और लागू किया जाना चाहिए- न केवल रोगियों के लाभ के लिए, बल्कि उनके परिवारों और समुदाय के लिए भी, उपयुक्त प्रौद्योगिकी और दवाओं के उपयोग पर ध्यान केंद्रित करते हुए।
अभी आवेदन करें
यदि आप परिचित से आगे बढ़ने और वहाँ रहने के लिए तैयार हैं जहाँ आपकी सबसे अधिक आवश्यकता है, तो हम आपको आवेदन करने के लिए आमंत्रित करते हैं।
आवेदन की अंतिम तिथि: 30 सितंबर 2026