यह कार्यक्रम भारत में शिक्षा में समानता और गुणवत्ता को बढ़ावा देने की हमारी प्रतिबद्धता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अज़ीम प्रेमजी स्कॉलरशिप का उद्देश्य छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सहायता प्रदान करना है, ताकि आर्थिक कठिनाइयाँ उनकी शिक्षा में बाधा न बनें।
इस स्कॉलरशिप की पात्रता के मानदंड सरल हैं और आवेदन प्रक्रिया भी आसान बनाई गई है, ताकि अधिक से अधिक छात्राएँ इसका लाभ उठा सकें। यह स्कॉलरशिप मेरिट, जाति, आय या धर्म के आधार पर नहीं दी जाती, बल्कि सभी पात्र छात्राओं के लिए उपलब्ध है।
चयनित छात्राओं को उनके स्नातक पाठ्यक्रम की अवधि के दौरान, जो 2 से 5 वर्ष तक हो सकती है, प्रति वर्ष ₹30,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस प्रकार, उन्हें कुल मिलाकर ₹1.5 लाख तक की सहायता प्राप्त हो सकती है। इस राशि का उपयोग वे अपनी कॉलेज फीस या उच्च शिक्षा पूरी करने से जुड़े अन्य आवश्यक खर्चों के लिए कर सकती हैं।
हमारा विस्तार
इस स्कॉलरशिप कार्यक्रम का देशभर में चरणबद्ध विस्तार किया जा रहा है।
वर्ष 2024-25 में इसे मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, और झारखंड के 100 से अधिक जिलों में शुरू किया गया था।
वर्ष 2025-26 में यह स्कॉलरशिप कार्यक्रम 18 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश तक विस्तारित किया गया, जिनमें अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पुडुचेरी, राजस्थान, सिक्किम, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं।
वर्ष 2026-27 में आंध्र प्रदेश और दिल्ली (NCT) को भी इस स्कॉलरशिप कार्यक्रम में शामिल किया जा रहा है।
अब तक इस स्कॉलरशिप के माध्यम से 1.95 लाख छात्राओं को सहायता प्रदान की जा चुकी है और आने वाले वर्षों में यह संख्या काफी बढ़ने की उम्मीद है। हमारा लक्ष्य प्रत्येक वर्ष 5 लाख छात्राओं को यह स्कॉलरशिप प्रदान करना है। यदि किसी उच्च शिक्षा कार्यक्रम की औसत अवधि तीन वर्ष मानी जाए, तो किसी भी समय लगभग 15 लाख छात्राएँ इस स्कॉलरशिप से लाभान्वित हो रही होंगी।
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